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राजा भगवंत राय खींची और उनकी वीर बहेलिया सेना

हिंदी साहित्य के इतिहासकार महेंद्र प्रताप सिंह द्वारा रचित पुस्तक 'भगवंतराय खींची और उनके मंडल के कवि' असोथर (वर्तमान फतेहपुर, उत्तर प्रदेश) के शासक महाराज भगवंतराय खींची तथा उनके काव्य-मंडल के इतिहास का प्रामाणिक दस्तावेज़ है। इसी ग्रंथ के आधार पर इस मंडल-क्षेत्र में बसने वाली साहसी जातियों — विशेषकर बहेलिया समाज — के गौरवशाली इतिहास का यह संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत है। गुप्तकाल एवं भगवंतराय खींची के मंडल में बहेलिया जाति पुस्तक में बताया गया है कि असोथर के शासक भगवंतराय खींची के मंडल-क्षेत्र की साहसी जातियों में अहीर, लोध, पासी और बहेलिया प्रमुख थीं। लेखक के अनुसार गुप्तकाल में ये जातियाँ राजाओं की शक्ति का प्रमुख आधार-स्तंभ हुआ करती थीं। इन जातियों में कठिन से कठिन कार्य पूरा करने की असाधारण क्षमता और योग्यता थी, और भगवंतराय के इस क्षेत्र में इनकी अच्छी-खासी आबादी थी। लेखक स्पष्ट करते हैं कि भगवंतराय खींची के इन साहसी जातियों के साथ अत्यंत घनिष्ठ संबंध थे। बहेलिया बस्ती का विशेष उल्लेख इसी पुस्तक में असोथर क्षेत्र की बहेलिया बस्ती का विशेष उल्लेख मिलता है। लेखक बताते ह...